Sunday, 9 April 2017

पिता की पुत्र से इच्छा

बेटा!कच्ची उम्र में कच्चे अकल है।
तुम्हारे पिता का इसमें दखल है।।
मंजिल है लंबी यदि लक्ष्य पाना,
मेहनत करो वरना मेरा कतल है।।

बनकर एकलव्य अर्जुन दिखाओ।
लक्ष्य मछली की आँख अपना बनाओ।।
हुनर को तुम्हारे करे सब सलाम,
बनकर के कुछ आप हमको दिखाओ।।

गर्व तुम पर करूँ महसूस ,न फूला समाउंगा।
समझ रहमो-करम प्रभु का,प्रभु के गीत गाऊंगा।।
 कली चुनकर बनाऊँ बनाऊँ संगीनी तेरी,
जैसे हीर हो कोई  दुल्हनिया ऐसी लाऊंगा।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094

वेलेंटाइन-डे सप्ताह("Valentine-Week" Poetry)

आते जायेगें जितने दिन,उनमें इश्क़ का इजहार ही होना है।
7 दिन की जिंदगी के बाद दोस्तों,फिर से टकरार ही होना है।।
माना कि 7 दिनों का माहौल है,सिर्फ इजहार-का-इश्क़ का।
लेकिन बचके रहना मेरे दोस्तों,चांस बहुत है इसमें रिश्क का।।

गुलाब तुम्हें भेजा है,सनम तुम स्वीकार करो।
अपने अधरों से मेरे,प्यार का इकरार करो।।
बैचेन हूँ सुनने को,मैं उस ढाई अक्षर को;
कहना है सिर्फ मेरा तुमसे,तुम प्यार करो-2।। (Happy Rose Day)

चाहे कितना तुझे दिल ये मेरा,आज बतलाऊँ मैं तुझको।
बिन प्यार के जीवन कैसा,अहसास कराऊँ मैं तुझको।।
छोडूं न कभी मैं साथ तेरा,ये वादा मेरा तुझसे प्रिये;
बिन जीवनसाथी की नैया में,पतवार बनाऊँ मैं तुझको।।(Happy Prapose Day)

बिन पुकारे मुझको हमेशा,तुम साथ पाओगे।
करो मुझसे वादा कि तुम, दोस्ती निभाओगे।।
याद रखना मुझको,उस पल तक सनम जब;
आप अकेले अकेले,डेरीमिल्क खाओगे।। (Happy Chocolate Day)

तुम Soft हो इतनी,कि जैसे है Teddy Bear.
सच्चा प्यार मैं तुझसे करता हूँ,ये बात है Clear.
कोई गिला-शिकवा नहीं हमारे और तुम्हारे बीच;
कुछ हो न जाये तुमको,इसलिए रहता है Care. (Happy Teddy Day)

रुठोगी जब तुम हमसे,मनाएंगे पकड़कर हाथ तुम्हारा।
दूर होगी जब तुम हमसे,रहे फिर भी अहसास तुम्हारा।।
जीते जी हमारे कोई,तकल्लुफ़ न तुम्हें होने देगें ;
करते है हम वादा सनम,छोड़ें न कभी साथ तुम्हारा।। (Happy Promise Day)

काश!जल्द वो दिन आये,मेरी जिंदगी में भी;
जब वाे मेरी वर्षों की,मन्नत में मिल जाये।
कहूँगा ईश्वर से फिर मैं,नहीं जरूरत तेरे जन्नत की;
जब उसकी बाहों में ही,मुझको जन्नत मिल जाये।।(Happy Hug Day)

क्या वो लम्हा होगा,मेरी जिंदगी का;
जब दूर होंगे हम दोनों,दुनियाँ के पहरों से।
फिर जरुरत क्या है मुझको,नीर पीने की;
प्यास तो मिट जायेगी,सिर्फ तेरे अधरों से।। (Happy Kiss Day)

बंधे हुए है हम उस जंजीर से,जिससे निकलना भी मुश्किल है।
दोस्तों,अब आदमी के दिमाग से ज्यादा,समझदार ये दिल है।।



रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9628368094,7985502377

बदलते दिन-माँ-बाप पर कविता

सब देवो में सबसे पहले पूजे जाते है,श्री गणेश भगवान।
की मात-पितु परिक्रमा ब्रह्माण्ड सम,कहा मात-पितु महान।।

याद कर अपने बचपन को,तू मेरे लाल।
रखती थी ध्यान माँ तेरा,जो हर ख्याल।।
भूला है फिर क्यूँ तू,उनके उपकारों को।
जिसने पाला तुझे,झेलकर कष्टों को।।
अब बूढ़े माँ-बाप का,तू सहारा नहीं।
साथ रहना तेरी बीबी को,गवांरा नहीं।।
ईर्ष्या की भावना रखते हो,दोनों अब।
सोचते  हो  यही  बस,मरेगें  ये  कब।।
"दीपक"कहता जो,वो मानो तुम।
जन्नत के रास्ते को,पहचानो तुम।।
क़द्र कर लो इनकी,मिलेगी जन्नत।
पूरी होगी तेरी फिर,सारी मन्नत।।

 मां-बाप का कर्ज़,कभी तुम चुका न पाअोगे।
लख चौरासी फिर भोगोगे,उनको अगर सताअोगे।।

लेखक की विनती-

तरस आता है मुझको,उन मिट्टी के पुतलों पर।
माँ-बाप का मान नहीं,है जिनके घरों पर।।
अरे!आज आओ,कसम खा लेते है सब यहाँ;
खुशियाँ बनके छाएंगे,फिर उनके चेहरों पर।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094

बेवफा प्रेमिका की रंगीन होली

कि चली गयी वो मुझको धोखा देके,
अब मोहब्बत अधूरी,रह गयी है हमारी।
वो किसी और के रंगों में भीग रही है,
और यहाँ दर्द में भीगी,जिंदगी है हमारी।।

कि सनम मुझे तेरी मीठी बातें,हमें हमेशा याद रहेगी।
भीगी हो बेकदर जिस रात में,वो बरसात याद रहेगी।।
आपको मिले इन्हीं रंगीलियों की रंगीन दुनिया हमेशा;
बस इस टूटे हुए दिल की,रब से यही फरियाद रहेगी।।

कि वो जिस्म का कुआँ,हो गए आज।
होली के रंगों में वो ऐसे,खो गए आज।।
चाहा था जिसे दोस्तों,पूरी शिद्दत से हमने;
देके धोखा वो,और किसी के हो गए आज।।

सनम तूने रंगों की होली में,
मेरी बेरंग कर दी है होली।
फिक्र तो ज़रा सा कर लेती,
मेरे प्यार की लगा दी है बोली।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094

कोई जी रहा है सनम,तुम्हें देखकर

कोई जी रहा है सनम,तुम्हे देखकर।
मुझे याद रखना तुम, हर डगर पर।।

साथ न छोड़ना,कभी तुम मेरा।
रहे नाम हर वक्त,जुबां पर तेरा।।
जी न पाऊँगा तुमसे,मैं जुदा होकर।
कोई जी ★★★★★★★★★।।

चाहूँ मैं तुझको,जान से ज्यादा।
मैं हूँ कृष्ण तेरा,तू है मेरी राधा।।
कैसे भूलूँ मैं तुझको,अपना मानकर।
कोई जी★★★★★★★★★★।।

जिंदगी मेरी तेरे,बिना है अधूरी।
तुझे मांगे बिन,दुआ भी न हो पूरी।।
दुआ रब से तू रहे,मेरे साथ जन्मभर।।
कोई जी★★★★★★★★★★।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094

जिंदगी से पश्चाताप

आज मैं अपनी जिंदगी का सबसे प्यारा गीत अर्ज करता हूँ, सभी का जीवन बहुत महत्वपूर्ण(स्वर्णिम) है, इस गीत में अर्ज किया है कि व्यक्ति आत्महत्या करते समय अपनी जिंदगी और परिवार के प्रति सोचता है ... परंतु परिस्थिति उस व्यक्ति के प्रतिकूल हो जाती है और वह व्यक्ति अंततः आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है।.....अर्ज है------

स्वर्णिम है मेरी जिंदगी,डर इसको कहीं खो न दूँ।
तड़प मिटती नहीं दिल की,जब तक की रो न लूँ।।

पहले अन्तरे में कवि कहना चाहता है कि अगर जिंदगी न होती तो न कोई मुसीबत और न कोई दर्द सहना पड़ता....और  कभी-कभी व्यक्ति अपनी भड़ास निकलने के लिए जिंदगी का नाम ले लेकर अपना बोझ हल्का करने की कोशिश करता है........अर्ज है-----

सोचता हूँ बस यही,काश!तू न होती।
दर्द क्या होता,जब जिंदगी न होती।।
जिंदगी है जाम गफलत,क्यों मैं पी न लूँ।
स्वर्णिम है मेरी★★★★★★★★★★★★★★★★।।

दूसरे अन्तरे में कवि कहता है कि जब जिंदगी जब मुझको छोड़कर जायेगी तो परिवार वालों पर क्या बीतेगी....पर अंततः किसी की परवाह न करते हुए आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है......अर्ज है-------

छोड़कर मेरा दामन,जब जायेगी तू।
साया जब उठे सर से,न समझ पायेगी तू।।
मिटे न रंजोगम तब तक,ये दुनियाँ छोड़ न दूँ।
स्वर्णिम है मेरी★★★★★★★★★★★★★★★★।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094

मेरे पापा

मेरे खातिर किसी से,मेरे पापा डरते नहीं।
मेरी फिक्र के सिवा,वो कुछ सोचते नहीं।।
आज तक मैंने न देखा,उनके जैसा कोई धनवान;
जेब खाली हो फिर भी,मना करते नहीं।।

रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094