रणनीतियां बिखरती रहती है।।
अरमान तो बहुत है इस दिल में,पर
इमारतें बनके ढहती रहती है।।
जो एक कदम पार जाता है।
निश्चित ही अपने लक्ष्य को,
वह एक बार पाता है।।
मेहनत गर पड़े तो,कोई राज है समझो,
क्यूंकि तराशा है वही जाता,
जो हीरा बाजार जाता है।।
स्वारथ खातिर लोग कुछ,आ करते पहचान।
जिन लोगों ने आज तक,किया नहीं सम्मान।।
किया नहीं सम्मान,कहो किस दम पर लड़ते।
पकड़ लिया मैदान,किन्तु है पैर उखड़ते।।
जनता का दिल जीतो,पहले करिये परस्वारथ।
जीते तभी चुनाव,सफ़ल होगा निजस्वारथ।।
सुख-दुःख में जो काम आता,उसको ही हमें जिताना है।
मतलब परस्त बस मौके पर,बुनते हर ताना-बाना है।।
किन्तु जनता सब कुछ देखती,सुनती-समझती है;
जो तन के उजले-मन के काले,उनको बन्धु हराना है।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.नं.-9628368094,7985502377
गुजरात की दशा देखकर,होश हो रहे दंग।
मोदी जी को लग रहा,हारेंगे हम जंग।।
हारेंगे हम जंग,शुरू हो उलटी गिनती।
हारे आप चुनाव,कर रही जनता विनती।।
फिसल हिमाचल रहा,न बनने वाली बात।
दिल्ली को फिर छोड़कर,भागोगे गुजरात।।
अगर आप है हारते,हिमाचल-गुजरात।
तब तुमको मालूम हो,मोदी जी औकात।।
मोदी जी औकात,दिखाए जनता पिछड़ी।
मोदी-योगी-राजनाथ ने,खूब पकाई खिचड़ी।।
दो हज़ार उन्नीस में,करो राम का जाप।
बातों में भरमा रहे,भोली जनता आप।।
केवल वादों से नहीं,भरने वाला पेट।
भोली जनता का सभी,करते है आखेट।।
करते है आखेट,दे रही जनता गारी।
बंद किया अनुदान,सब्सिडी की तैयारी।।
मजदूर-किसान-कर्मचारी,दे तुम्हें न सम्बल।
नेता बन प्रतिपक्ष,सदन में बैठो केवल।।
घूमें देश-विदेश पर,नहीं सपारे आप।
विषधर काला नाग है,पाक सभी का बाप।।
पाक सभी का बाप,न करता किसी से मेल।
मौका पाते ही तुरत,देता सबको पेल।।
मचा रहा आतंक,खुशी से फिर भी झूमें।
बदल सके न आप,नतीजा क्या है घूमें।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.नं.-9628368094,7985502377