गुजरात की दशा देखकर,होश हो रहे दंग।
मोदी जी को लग रहा,हारेंगे हम जंग।।
हारेंगे हम जंग,शुरू हो उलटी गिनती।
हारे आप चुनाव,कर रही जनता विनती।।
फिसल हिमाचल रहा,न बनने वाली बात।
दिल्ली को फिर छोड़कर,भागोगे गुजरात।।
अगर आप है हारते,हिमाचल-गुजरात।
तब तुमको मालूम हो,मोदी जी औकात।।
मोदी जी औकात,दिखाए जनता पिछड़ी।
मोदी-योगी-राजनाथ ने,खूब पकाई खिचड़ी।।
दो हज़ार उन्नीस में,करो राम का जाप।
बातों में भरमा रहे,भोली जनता आप।।
केवल वादों से नहीं,भरने वाला पेट।
भोली जनता का सभी,करते है आखेट।।
करते है आखेट,दे रही जनता गारी।
बंद किया अनुदान,सब्सिडी की तैयारी।।
मजदूर-किसान-कर्मचारी,दे तुम्हें न सम्बल।
नेता बन प्रतिपक्ष,सदन में बैठो केवल।।
घूमें देश-विदेश पर,नहीं सपारे आप।
विषधर काला नाग है,पाक सभी का बाप।।
पाक सभी का बाप,न करता किसी से मेल।
मौका पाते ही तुरत,देता सबको पेल।।
मचा रहा आतंक,खुशी से फिर भी झूमें।
बदल सके न आप,नतीजा क्या है घूमें।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.नं.-9628368094,7985502377
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