इस वर्ष दीपावली,सीमा पर मनाएंगे।
अपनी मातृभूमि का,ऋण हम चुकायेगें।
अपनी देहरी पर हम भी दीप जलाएंगे।
आँगन में अपने भी ,रंगोली सजायेंगे।।
पटाखे की जगह,बंदूक हम दगायेगें।
इस नापाक का हम,अंधकार मिटायेंगे।।
तजकर प्राण,मातृभूमि की रक्षा करेगें।
गम नहीं जलते"दीपक"फिर से बुझेगें।।
बुझ गए तो पहनेगें तिरंगा,और होगी सलामी।
अगली बार फिर से मनाएंगे सीमा पर दीवाली।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.-9560802595,9628368094
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