आये है नवरात्र के दिन;करूँ माँ का पूजन अर्चन।
आते माँ की शरण में है सब;हो सज्जन चाहे दुर्जन।।
आजा तू भी शरण में ;कर माँ का वंदन बन्दे।
भाग्य तेरे जाग जायेंगे;कटे सब कष्टों के फंदे।।
नौ दिन,नव रूप लिए,है आयी माँ दुर्गा हरने पाप।
काली बन संहार करे जब,तब असुर है जाते काँप।।
फिर भी मनुज तू स्वार्थ में अँधा,कर रहा है गलतियाँ;
बेटे की झूठी आस लिए,बेटी को है माने अभिशाप।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
मो.नं-9628368094,7985502377
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