मस्त बहारों का मौसम,बालों का रंग सुनहरा।
कैसे भूलूँ मैं उसको,जो चाँद-सा रोशन चेहरा।।
चंचल नजरों का क्या,नजर तो मिल जाती है।
जब तू न हो तो तेरे बिन,यादें तड़पाती है।।
मिल जाये नज़र जो फिर से,मैं डूब जाऊं गहरा।
मस्त बहारों का★★★★★★★★★★★।।
हर वक्त तेरी यादों का,आंखों में है समंदर रहता।
फिर भी न जाने जहां क्यूँ, मुझपे है शक करता।।
तुझ पर रहता हरदम,है इस दुनियाँ का पहरा।
मस्त बहारों का★★★★★★★★★★★।।
बस एक दुआ मेरी बंधन में,हम दोनों बंध जाए।
टूटे न बंधन ऐसा जो,सातों जनम साथ निभाए।।
प्यार में तेरे फिर पागल हो,नाचूँ बांध के सेहरा।
मस्त बहारों का★★★★★★★★★★★।।
रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा"दीपक"
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